रुड़की
वन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद होने के आरोप हैं कि उन्हें वन विभाग की कार्रवाई का भी डर नहीं रहा। रुड़की रेंज के शेरपुर क्षेत्र में रविवार देर रात प्रतिबंधित आम के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर वन विभाग के सुरक्षा बल (एसओजी) की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक कथित तौर पर आम की लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर आरोपी वहां से निकल चुके थे।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा बल की टीम ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का पीछा किया। आरोप है कि रास्ते में टीम के वाहन को आगे निकलने का मौका नहीं दिया गया। इसके बाद मामला कलियर क्षेत्र तक पहुंचा, जहां कथित तौर पर आम की लकड़ी पलटकर आरोपी ट्रैक्टर लेकर फरार हो गए। सूत्रों के हवाले से टीम के साथ हाथापाई होने की बात भी सामने आई है, हालांकि UK भारत इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
इस पूरे मामले ने वन एवं उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब शेरपुर में प्रतिबंधित आम के पेड़ों की कटाई की जा रही थी, तब संबंधित विभाग के अधिकारी कहां थे? क्षेत्रीय बीट और सेक्शन स्तर के कर्मचारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? यदि सुरक्षा बल को सूचना मिल सकती है, तो नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई?
वहीं, सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर काटी गई आम की लकड़ी को एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ी आरा मशीन पर ले जाए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि लकड़ी कहां ले जाई जा रही थी और इस मामले में कौन-कौन शामिल था। मामले को लेकर उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने सुरक्षा बल की टीम को केस काटकर आगे की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग केवल केस काटने तक ही कार्रवाई सीमित रखेगा, या आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ पुलिस में तहरीर देकर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा? साथ ही, प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई में विभागीय लापरवाही या किसी अन्य की भूमिका सामने आती है तो क्या उसकी भी जांच होगी?
फिलहाल पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस प्रकरण में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और कथित वन माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
