रुड़की
रुड़की रेंज के मंगलौर अनुभाग के लाठरदेवा हूण क्षेत्र में आम के हरे-भरे पेड़ों की लॉपिंग का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक करीब 24 आम के पेड़ों की लॉपिंग की गई थी और मौके से लगभग 16 क्विंटल लकड़ी बरामद की गई। विभाग की ओर से बगीचा स्वामी विकास चंद और ठेकेदार मुस्तकीम मंगलौरी के खिलाफ केस दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।बताया जा रहा है कि मामले की सूचना मीडिया के माध्यम से उपप्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ तक पहुंची। इसके बाद उनके निर्देश पर सुरक्षा बल रुड़की को मौके पर भेजा गया, जहां टीम ने पत्तों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी और मौके पर पड़ी आम की लकड़ी को भी जब्त किया।
लेकिन सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि मंगलौर अनुभाग में लगातार सामने आ रहे मामलों में जवाबदेही का भी है।कुछ दिन पहले भगवानपुर क्षेत्र में भी आम के पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला सामने आया था। उस मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बल और बीट अधिकारी को अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि लाठरदेवा हूण के मामले में सेक्शन अधिकारी और बीट अधिकारी की भूमिका और निगरानी की भी जांच होगी या नहीं?
क्योंकि सवाल यह है कि अगर क्षेत्र में करीब दो दर्जन पेड़ों की लॉपिंग हो गई, लकड़ी मौके पर पड़ी रही और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक पहुंच गई, तो संबंधित क्षेत्रीय कर्मचारियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई?इतना ही नहीं, इसी मंगलौर अनुभाग में कुछ समय पूर्व यूकेलिप्टस के सरकारी पेड़ों की कटाई का मामला भी सामने आने की बात कही गई थी। ऐसे में सवाल यह है कि इन मामलों में क्षेत्रीय स्तर पर जवाबदेही किसकी बनती है और अब तक किसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
इसके अलावा बंदर को गोली लगने का मामला भी इसी सेक्शन से जुड़ा बताया जा रहा है। यदि यह मामला भी विभागीय संज्ञान में आया था, तो अब तक जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कार्रवाई हुई—यह भी बड़ा सवाल है।

अब यहां सवाल DFO हरिद्वार की कार्रवाई की नीति को लेकर भी उठ रहे हैं। जब एक क्षेत्र में पेड़ों के कटान के मामले में अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सकती है, तो मंगलौर अनुभाग में सामने आए लगातार मामलों में जवाबदेही तय करने का पैमाना क्या है?क्या एक ही विभाग में अलग-अलग मामलों के लिए अलग-अलग नियम लागू हो रहे हैं?इन सवालों का जवाब वन विभाग के उच्चाधिकारियों, खासकर DFO हरिद्वार से अपेक्षित है। आखिर मंगलौर अनुभाग में सामने आ रहे इन मामलों में कितने मामलों में कार्रवाई हुई और कितने मामलों में सिर्फ केस दर्ज कर मामला छोड़ दिया गया?फिलहाल लाठरदेवा हूण में आम के पेड़ों की लॉपिंग के मामले में कार्रवाई तो हुई है, लेकिन क्षेत्रीय निगरानी और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही पर क्या कार्रवाई होगी-यह सवाल हम वन विभाग के अधिकारियों पर छोड़ते हैं।
