रुड़की
वन विभाग की निगरानी के बावजूद खनन सामग्री से लदी घोड़ा गाड़ियां उत्तराखंड में कैसे प्रवेश कर रही हैं? यह सवाल बुधवार सुबह रुड़की और सिकंदरपुर क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई के बाद खड़ा हो गया है। वन विभाग की टीम ने अलग-अलग स्थानों से खनन सामग्री से लदी दो घोड़ा गाड़ियों को पकड़कर जब्त कर लिया। दोनों वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए मंगलौर चौकी में खड़ा कराया गया है।वन क्षेत्राधिकारी रुड़की रविंद्र वेदवाल के अनुसार, वन विभाग की टीम ने एक घोड़ा गाड़ी को रुड़की क्षेत्र से, जबकि दूसरी को सिकंदरपुर, भगवानपुर से पकड़ा। जांच के दौरान दोनों घोड़ा गाड़ियों के पास वन विभाग के बैरियर से गुजरने के बाद आवश्यक कागजात नहीं मिले। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों वाहन बिना वैध रवानगी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। इसके बाद वन विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों वाहनों को जब्त कर लिया।
वन क्षेत्राधिकारी रविंद्र वेदवाल ने बताया कि वन विभाग अवैध रूप से खनन सामग्री के परिवहन पर रोक लगाने के लिए लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहा है। इस तरह की गतिविधियों में शामिल वाहनों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
बैरियर पार कर कैसे पहुंचीं घोड़ा गाड़ियां?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल काली नदी चौकी स्थित वन विभाग के बैरियर की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और यमुनानगर की ओर से खनन सामग्री लेकर आने वाले वाहन उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि घोड़ा गाड़ियों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, तो वे वन विभाग के बैरियर से होकर आगे कैसे पहुंच गईं? क्या बैरियर पर तैनात कर्मचारियों ने दस्तावेजों की जांच नहीं की, या फिर निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई?
हालांकि, अभी तक किसी कर्मचारी की मिलीभगत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों को यह पता लगाना चाहिए कि दोनों घोड़ा गाड़ियां किन परिस्थितियों में बैरियर पार कर गईं और क्या इस मामले में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई।
राजस्व के नुकसान की आशंका, जांच से खुलेगा राज
वन विभाग के बैरियरों पर वाहनों की निगरानी और आवश्यक दस्तावेजों की जांच राजस्व व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में बिना वैध रवानगी के खनन सामग्री का परिवहन होने की आशंका विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी कर्मचारी की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।कार्रवाई के दौरान वन क्षेत्राधिकारी रविंद्र वेदवाल, सेक्शन अधिकारी उषा रानी, बीट अधिकारी भूपेंद्र सिंह, बीट अधिकारी सोनिया, सुरक्षा बल प्रभारी सोनिया शर्मा, वन दरोगा फरमान मलिक, वन आरक्षी अंकित सिंह और वन आरक्षी अनुज कंबोज मौजूद रहे।फिलहाल, वन विभाग ने दोनों घोड़ा गाड़ियों को जब्त कर कार्रवाई की है। अब देखना होगा कि विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या काली नदी चौकी के बैरियर की निगरानी व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है। दो घोड़ा गाड़ियों की जब्ती से शुरू हुआ यह मामला अब विभागीय जवाबदेही और राजस्व सुरक्षा से जुड़े सवालों के बीच आ गया है।
